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अवसंरचना विकास देश की अर्थव्यवस्था की प्रेरक शक्ति: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि अवसंरचना विकास देश की अर्थव्यवस्था की प्रेरक शक्ति है। इसी रास्ते पर चलते हुए भारत 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य को प्राप्त करेगा।

प्रधानमंत्री आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा सह-संचालन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा ‘अवसंरचना और निवेश’ विषय पर आयोजित बजट पश्चात वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी देश के विकास में अवसंरचना का महत्व हमेशा से ही रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष का बजट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की ग्रोथ को नई ऊर्जा देने वाला है। दुनिया के बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स और कई प्रतिष्ठित मीडिया हाउसेस ने भारत के बजट और उसके रणनीतिक निर्णयों की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।

प्रधानमंत्री ने वोट बैंक की राजनीति के लिए अवसंरचना विकास पर निवेश नहीं करने के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “हमारे यहां दशकों तक एक सोच हावी रही कि गरीबी एक मनोभाव है। इसी सोच की वजह से देश के अवसंरचना पर निवेश करने में पहले की सरकारों को दिक्कत होती थी।” प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने ना सिर्फ देश को इस सोच से बाहर निकाला है बल्कि वो आधुनिक अवंसरचना पर रिकॉर्ड निवेश भी कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज नेशनल हाईवे का औसत वार्षिक निर्माण 2014 की तुलना में दोगुना हो गया है। 2014 से पहले हर साल 600 रूट किमी. रेल लाइन का इलेक्ट्रिफिकेशन होता था, आज ये लगभग 4,000 रूट किमी. तक पहुंच रहा है। एयरपोर्ट की संख्या 2014 की तुलना में 74 से बढ़कर 150 के आसपास पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य से, स्वतंत्रता के बाद, आधुनिक बुनियादी ढांचे पर अधिक आवश्यक जोर नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान, भारत के आधारभूत संरचना का, भारत के मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स का कायाकल्प करने जा रहा है। ये आर्थिक और बुनियादी ढांचा योजना को, विकास को एकीकृत करने का बहुत बड़ा उपकरण है। उन्होंने कहा कि नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइप लाइन के तहत सरकार आने वाले समय में 110 लाख करोड़ रुपये इंवेस्ट करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ये समय प्रत्येक स्टेक होल्डर के लिए ये नए दायित्व, नई संभावनाओं और साहसपूर्ण निर्णय का है।

प्रधानमंत्री ने भौतिक मूल ढांचा के साथ ही देश के सामाजिक बुनियादी ढांचा को भी उतना ही आवश्यक बताया। उन्होंने कहा, “हमारा सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर जितना मजबूत होगा, उतने ही प्रतिभावान युवा, स्किल युवा, काम करने के लिए आगे आ पाएंगे। इसलिए स्किल डेवलपमेंट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, फाइनेंस स्किल पर जोर दिया जाना बहुत आवश्यक है।”

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