मध्यप्रदेश

MP में एक सरकारी नौकरी 80 लाख की, एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज से तीन साल में सिर्फ 21 युवाओं को रोजगार

भोपाल।  मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के बेरोजगारों को रोजगार उपबल्ध कराने के लिए प्रदेशभर में इंप्लाइमेंट एक्सचेंज ऑफिस खोले हैं। इन इंप्लाइमेंट ऑफिसों ने अप्रैल 2020 से दिसंबर 2022 तक केवल 21 लोगों को ही रोजगार उपलब्ध कराया है। जबकि दफ्तरों को चलाने में 16 करोड़ से ज्यादा खर्च किए गए हैं। यह जानकारी खुद तकनीकी शिक्षा रोजगार मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने एक मार्च को विधानसभा में कांग्रेस विधायक मेवाराम जाटव के सवाल के जवाब में दी।

एक सरकारी नौकरी के लिये सरकार ने लगभग 80 लाख रुपए खर्चे

राज्य में 1 अप्रैल 2020 से ऐसे दफ्तरों को चलाने में 16.74 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इन दफ्तरों में 37,80,679 शिक्षित और 1,12,470 अशिक्षित आवेदकों ने पंजीकरण करवाया है। सरकारी नौकरी सिर्फ 21 उम्मीदवारों को ही मिली है। यानी एक सरकारी नौकरी के लिये सरकार ने लगभग 80 लाख रुपए खर्चे हैं।

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में बेरोजगारी चरम पर है। राज्य में 1-1 पद के लिये हजारों उम्मीदवार कतार में हैं, कई परीक्षाएं रद्द हो रही हैं। सरकार हर साल 1 लाख पद भरने का दावा करती है। चुनाव पूर्व एक बार फिर यही दुहराया जा रहा है। राज्य के रोजगार कार्यालयों को चलाने में तो करोड़ों खर्च हो रहे हैं लेकिन वहां से बेरोजगारों को सिर्फ निराशा मिल रही है।

राज्य में 39 लाख युवा बेरोजगार

विधानसभा एक सवाल के जवाब में तकनीकी शिक्षा रोजगार मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने ने लिखित उत्तर में बताया कि राज्य में हर महीने 1.25 लाख बेरोजगार बढ़ रहे हैं।  अब तक मौजूद आंकड़ों के हिसाब से राज्य में 39 लाख युवा बेरोजगार हैं । प्रदेश में 1 अप्रैल 2022 को रोजगार कार्यालयों में 25,81,708 शिक्षित बेरोजगारों ने नाम दर्ज थे। यह संख्या 1 जनवरी 2023 को बढ़कर 38,92, 949 हो गई।। प्रदेश में 10 महीनों में 13 लाख 11 हजार बेरोजगार बढ़ गए। हर महीने प्रदेश में सवा लाख बेरोजगार बढ़ गए।  इनमें से ज्यादातर सामान्य वर्ग और ओबीसी कैटेगरी से थे।

शिवराज सरकार ने कहा है कि वो हर महीने रोजगार दिवस मनाएगी। अप्रैल 2020 से जनवरी 2023 तक 1321 रोजगार मेलों का आयोजन किया जा चुका है। सरकार इस माध्यम बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार दिलाने की बात करती है। लेकिन राज्य सरकार ने ही विधानसभा में बताया कि यहां से न्यूनतम 1000 रुपए महीने पर नौकरी दिलवाई गई। वहीं औसतन 6000 से 9000 रुपए तक की नौकरी निजी कंपनियों ने दी।

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