भोपाल: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बैंकिंग सेक्टर में आज भारी उथल-पुथल देखने को मिली। 5-दिवसीय कार्य सप्ताह (5-Day Banking) और अन्य लंबित मांगों को लेकर देशभर के बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस आंदोलन का व्यापक असर देखा गया, जहाँ हजारों बैंककर्मियों ने एकजुट होकर शक्ति प्रदर्शन किया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!भोपाल के एमपी नगर स्थित प्रेस कॉम्प्लेक्स (PNB के पास) में सुबह से ही गहमागहमी रही। यहाँ भोपाल के विभिन्न बैंकों के 5000 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से धरना दिया और अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
5-दिवसीय बैंकिंग: शनिवार और रविवार के पूर्ण अवकाश की तत्काल लागू करने की मांग।
स्वास्थ्य एवं सम्मान: बैंककर्मियों की कार्य स्थितियों में सुधार और मेडिकल सुविधाओं का विस्तार।
पेंशन अपडेशन: लंबित पेंशन संबंधी मामलों का शीघ्र निराकरण।
हड़ताल का नेतृत्व UFBU के संयोजक संजीव कुमार मिश्रा, मध्य प्रदेश के अध्यक्ष सुबीन सिन्हा और सेक्रेटरी दिनेश झा ने किया। भारतीय स्टेट बैंक अधिकारी संघ (भोपाल सर्कल) के अध्यक्ष अनिल कुमार श्रीवास्तव ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बैंक प्रबंधन और सरकार की टालमटोल की नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस दौरान वरिष्ठ कामरेड वीरू शर्मा, दीपकरत्न शर्मा, संजय कुदेशिया, नज़ीर कुरेशी और अन्य पदाधिकारियों ने भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। महिला कर्मियों की बड़ी संख्या में भागीदारी ने इस आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान की।
नेताओं ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि 5-दिवसीय बैंकिंग केवल कर्मचारियों की सुविधा के लिए नहीं है। यह निम्नलिखित कारणों से अनिवार्य है:
स्वस्थ कार्य-संस्कृति: बेहतर ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी।
ग्राहक सेवा में सुधार: तनावमुक्त कर्मचारी ग्राहकों को बेहतर सेवा दे पाएंगे।
जोखिम प्रबंधन: प्रभावी बैंकिंग ऑपरेशन्स के लिए पर्याप्त विश्राम आवश्यक है।
भोपाल के अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचल मुख्यालयों पर भी AIBOC और अन्य घटक दलों के बैनर तले जोरदार प्रदर्शन हुए। इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रायपुर जैसे शहरों में भी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह मांग पूरे क्षेत्र की एक निर्णायक आवाज बन चुकी है।
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