नई दिल्ली/दुबई: मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब केवल ज़मीनी जंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह डिजिटल वर्ल्ड (Digital World) के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। ईरान द्वारा अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी के बाद दुनिया भर में ‘डिजिटल ब्लैकआउट’ का डर सताने लगा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यदि Google, Apple और Meta जैसी कंपनियों के डेटा सेंटर्स पर हमला होता है, तो भारत सहित पूरी दुनिया में इंटरनेट सेवाएं ठप हो सकती हैं।
मिडिल ईस्ट के देश जैसे UAE और बहरीन अब ग्लोबल इंटरनेट के बड़े हब बन चुके हैं। अमेज़न (AWS), गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे दिग्गजों ने यहाँ अपने विशाल डेटा सेंटर स्थापित किए हैं।
साइबर और फिजिकल अटैक: ईरान सीधे अमेरिका पर हमला करने के बजाय इन क्षेत्रीय डेटा सेंटर्स को ड्रोन, मिसाइल या साइबर हमलों के जरिए निशाना बना सकता है।
अमेज़न का उदाहरण: बहरीन स्थित अमेज़न के डेटा सेंटर पर असर की खबरें पहले ही चिंता बढ़ा चुकी हैं।
इंटरनेट केबल्स: समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स, जो एशिया को यूरोप से जोड़ती हैं, अगर उन्हें नुकसान पहुँचाया गया तो भारत में इंटरनेट की रफ्तार सुस्त पड़ जाएगी या पूरी तरह बंद हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन कंपनियों का सिस्टम ‘डिजिटल इकोनॉमी की रीढ़’ है।
Google: अगर गूगल के सर्वर डाउन होते हैं, तो न केवल जीमेल और यूट्यूब बंद होंगे, बल्कि गूगल मैप्स पर आधारित डिलीवरी (Swiggy, Zomato) और ट्रांसपोर्ट (Ola, Uber) सेवाएं भी रुक जाएंगी।
Meta: व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के बंद होने से ग्लोबल कम्युनिकेशन और छोटे व्यापारियों का बिजनेस ठप हो सकता है।
Apple: आईफोन यूजर्स के लिए ऐप स्टोर, आईक्लाउड डेटा और पेमेंट सिस्टम (Apple Pay) पहुंच से बाहर हो सकते हैं।
डेटा सेंटर का गणित: डेटा सेंटर को 24×7 बिजली और कूलिंग की जरूरत होती है। यदि बिजली सप्लाई या नेटवर्क लाइन को काटा जाता है, तो सर्वर सुरक्षा कारणों से खुद को शटडाउन कर लेते हैं, जिससे सेवाएं अचानक बंद हो जाती हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा डेटा कंज्यूमर है। मिडिल ईस्ट में किसी भी प्रकार की डिजिटल बाधा का भारत पर सीधा असर पड़ेगा:
बैंकिंग और UPI: भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम काफी हद तक इन टेक दिग्गजों के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर है।
IT सेक्टर: भारत की हजारों आईटी कंपनियां विदेशी क्लाउड सर्वर का उपयोग करती हैं, जिससे उनका कामकाज प्रभावित हो सकता है।
सोशल इम्पैक्ट: करोड़ों भारतीयों के लिए व्हाट्सएप और यूट्यूब सूचना और मनोरंजन का प्राथमिक स्रोत हैं। इनका बंद होना एक बड़े सामाजिक और आर्थिक संकट को जन्म दे सकता है।
डिजिटल दुनिया में एक छोटा सा व्यवधान भी खरबों डॉलर का नुकसान कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट देशों को अपनी ‘डिजिटल संप्रभुता’ (Digital Sovereignty) और खुद के सर्वर हब बनाने की दिशा में सोचने पर मजबूर कर रहा है।
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