रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार, मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव हो रहा है। रूस ने यह फैसला मुख्य रूप से निम्नलिखित कारणों से लिया है:
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!घरेलू कीमतों पर नियंत्रण: रूस में पेट्रोल की कीमतें न बढ़ें, इसके लिए सरकार ने घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दी है।
खेती का सीजन: रूस में वसंत ऋतु में बुवाई (Spring Sowing) का समय होता है, जिसमें ईंधन की मांग बढ़ जाती है।
रिफाइनरी मेंटेनेंस: कई रूसी रिफाइनरियों में मेंटेनेंस का काम चल रहा है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ा है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल (Crude Oil) आयात करता है। रूस के इस फैसले के भारत के लिए दो पहलू हैं:
भारत रूस से मुख्य रूप से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदता है, न कि बना-बनाया पेट्रोल (Gasoline)। भारत अपनी रिफाइनरियों में कच्चे तेल को प्रोसेस करके खुद पेट्रोल-डीजल बनाता है। इसलिए, रूस के गैसोलीन बैन से भारत में पेट्रोल की फिजिकल कमी होने की संभावना कम है।
जब रूस जैसा बड़ा निर्यातक बाजार से बाहर होता है, तो वैश्विक बाजार में पेट्रोल की कीमतें बढ़ती हैं। यदि ग्लोबल मार्केट में कीमतें बढ़ीं, तो भारतीय तेल कंपनियों (OMCs) पर दबाव बढ़ेगा, जिससे भविष्य में घरेलू कीमतों में बदलाव की संभावना बन सकती है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान संकट के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई बाधित हुई है। इसे देखते हुए भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है। मार्च 2026 में रूस से भारत का आयात रिकॉर्ड स्तर (करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन) के करीब पहुंच सकता है।
भारत सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए पहले ही कुछ कड़े कदम उठाए हैं:
एक्साइज ड्यूटी में कटौती: सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर तक की भारी कटौती की है ताकि आम जनता पर बोझ न पड़े।
निर्यात पर टैक्स: घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत ने डीजल और एटीएफ (Jet Fuel) के निर्यात पर टैक्स लगा दिया है।
पर्याप्त स्टॉक: पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास अगले दो महीनों के लिए पर्याप्त तेल का भंडार मौजूद है।
रूस का गैसोलीन एक्सपोर्ट बैन सीधे तौर पर भारत की पेट्रोल सप्लाई को नहीं रोकेगा, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल की कीमतें एक बड़ी चुनौती हैं। भारत सरकार की सक्रियता और रूस के साथ बढ़ते कच्चे तेल के व्यापार ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रण में रखा है।
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