मध्यप्रदेश

गर्भावस्था केवल शारीरिक बदलाव नहीं, भावनाओं की भी एक नई यात्रा है: नोबल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में ‘गर्भ संस्कार’ सत्र आयोजित

भोपाल। शहर के नोबल मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल द्वारा “गर्भ संस्कार : नोबल पहल” के अंतर्गत गर्भावस्था के दौरान होने वाले भावनात्मक बदलावों पर केंद्रित एक विस्तृत संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाना, उनकी भावनाओं को समझने में मदद करना और इस महत्वपूर्ण जीवन-यात्रा को अधिक सहज, संतुलित और सकारात्मक बनाना रहा।

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कार्यक्रम में ट्रांसफॉर्मेशनल साइकोलॉजिस्ट रेनू हांडा ने विस्तार से बताया कि गर्भावस्था केवल शारीरिक परिवर्तन नहीं, बल्कि मन और भावनाओं में भी गहरा बदलाव लाती है। हार्मोनल परिवर्तन के कारण महिलाओं की सोचने और समझने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे कई बार भावनाएं अचानक बदल जाती हैं और व्यक्ति अपने ही भावों को उलट महसूस करने लगता है। उन्होंने कहा कि मानव स्वभाव के कारण अक्सर नकारात्मक विचार पहले आते हैं, इसलिए ऐसे समय में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय स्वयं को समय देना और भावनाओं को समझना बेहद जरूरी है।

रेनू हांडा ने उपस्थित महिलाओं को बेहतर महसूस करने के सरल और प्रभावी तरीके भी बताए। उन्होंने कहा कि अपनी भावनाओं को पहचानना और उन्हें नाम देना, गहरी सांस लेकर वर्तमान क्षण में लौटना, स्वयं के प्रति सहानुभूति रखना और अपने अनुभवों को परिवार या करीबी लोगों के साथ साझा करना मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। साथ ही परिवार और जीवनसाथी की भूमिका भी इस दौरान बेहद महत्वपूर्ण होती है, जिनके सहयोग से गर्भवती महिला इस दौर को अधिक सहजता से जी सकती है।

इस अवसर पर डीसीपी श्रद्धा तिवारी ने अपने गर्भावस्था के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस दौरान भावनात्मक उतार-चढ़ाव सामान्य हैं और सही मार्गदर्शन व समर्थन से इन्हें सकारात्मक ऊर्जा में बदला जा सकता है। उनके अनुभवों ने कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को आत्मविश्वास और प्रेरणा प्रदान की।

कार्यक्रम में अस्पताल की मेडिकल डायरेक्टर पद्मा मिश्रा एवं डॉ. प्रिया सिंह भी मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि नोबल अस्पताल का यह प्रयास केवल चिकित्सकीय देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भवती महिलाओं के संपूर्ण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया और विशेषज्ञों से अपने सवालों के जवाब भी प्राप्त किए। इस संवाद सत्र ने न केवल महिलाओं को अपनी भावनाओं को समझने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि गर्भावस्था की यह यात्रा सही मार्गदर्शन और सहयोग से और अधिक सुंदर व संतुलित बन सकती है।

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