भोपाल

भोपाल में माँ राजराजेश्वरी का विराट महानुष्ठान 26 अक्टूबर को, 50 हजार श्रद्धालु करेंगे एक करोड़ अर्चन

भोपाल। राजधानी के लाल परेड ग्राउंड में 26 अक्टूबर को आयोजित होने वाले विराट माँ राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन महानुष्ठान की तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोजन की व्यवस्थाओं का जायजा लेने संत शिरोमणि श्री रावतपुरा सरकार महाराज मंगलवार को लाल परेड ग्राउंड पहुंचे। उन्होंने आयोजन स्थल का निरीक्षण कर सेवा समिति एवं भक्त मंडल को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। महाराज श्री ने कहा कि महानुष्ठान की प्रत्येक इकाई का निर्माण दिशा, कोण और वास्तु शास्त्र के निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप किया जाएगा।

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मुख्य मंच से लेकर हवन कुंड तक हर इकाई का होगा विशेष माप

पूज्य महाराज श्री ने बताया कि माँ राजराजेश्वरी की आराधना का विधान अत्यंत गूढ़ है। इसमें दिशा, कोण और वास्तु का विशेष महत्व माना गया है। मुख्य मंच, आचार्य पीठ, यजमान पीठ, श्रद्धालुओं के लिए हजारों कलशों की श्रृंखला और हवन कुंड सहित आयोजन स्थल की प्रत्येक इकाई का विशेष माप एवं निर्धारित स्थान होगा। संपूर्ण व्यवस्था वास्तु शास्त्र के अनुरूप स्थापित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि माँ राजराजेश्वरी की श्रीविद्या उपासना भगवान सदाशिव द्वारा प्रदत्त ब्रह्मविद्या मानी जाती है। परंपरागत रूप से इसमें एकांतिक साधना की पद्धति प्रचलित रही है, लेकिन विश्व कल्याण और लोक मंगल की कामना से भोपाल में इसे इतने विराट स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है।

आंतरिक शक्ति के जागरण की साधना है श्रीविद्या

महाराज श्री ने श्रीविद्या उपासना के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अनुष्ठान बाह्य शक्ति के बजाय मनुष्य की आंतरिक शक्ति के जागरण पर केंद्रित है। आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार यह साधना कुंडलिनी जागरण के माध्यम से इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति के उत्कर्ष का मार्ग प्रशस्त करती है।

उन्होंने बताया कि श्रीललिता सहस्रनाम में माँ राजराजेश्वरी के एक हजार नामों का वर्णन मिलता है। श्रीविद्या परंपरा में इन नामों का अर्चन साधक के भीतर मूलाधार में सुप्त मानी जाने वाली आध्यात्मिक शक्ति के जागरण से जुड़ा हुआ है।

50 हजार श्रद्धालु करेंगे एक करोड़ अर्चन

महाराज श्री ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा के दिन माँ राजराजेश्वरी की चंद्रमंडल में विशेष उपस्थिति मानी जाती है। इसी कारण शरद पूर्णिमा पर उनके अर्चन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।

आयोजकों के अनुसार, 26 अक्टूबर को आयोजित इस विराट महानुष्ठान में लगभग 50 हजार श्रद्धालु भाग लेंगे। पूज्य रावतपुरा सरकार महाराज के सान्निध्य एवं 1100 आचार्यों के मार्गदर्शन में एक करोड़ हरिद्रा-कुंकुम अर्चन संपन्न किए जाएंगे।

आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से भारतीय पारंपरिक परिधान धारण कर लाल परेड ग्राउंड पहुंचने का आग्रह किया है। श्रद्धालु सायं 5:30 बजे से आयोजन स्थल पर अपना निर्धारित स्थान ग्रहण कर सकेंगे। महानुष्ठान को लेकर सेवा समिति और भक्त मंडल द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

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