अधिकांश वैज्ञानिक भी यही जानते हैं कि रोग की शुरुआत पेट से ही हुआ करती है और शायद ही कोई रोग इसका अपवाद होता होगा लोग भूख न लगने पर भी ताकत बनाए रखने के लिए खाना जरूरी मानते हैं यह गलत ही कहते हैं ऐसी हालत में ग्रहण किए हुए भोजन की शरीर को जरूरत नहीं होती क्योंकि उचित रूप से पाचन भी नहीं हो सकता इसे मलवे के रूप में आंतो से बाहर निकालने के लिए शरीर के अतिरिक्त शक्ति लगाने की जरूरत पड़ती है ।
पपीते की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह वानस्पतिक पेप्सिन का जो सबसे पाचक होता है एकमात्र साधन है इसलिए खाद्य की दृष्टि से इसका बहुत महत्व भी है क्यों की इससे निकलने वाला रस और प्रोटीन बहुत जल्द पचा देता है पपीता आंत संबंधी विकारों में बहुत लाभदायक सिद्ध होता है। हमेशा गर्म देश में लोग सर्दियों से इस औषधीय गुणों से युक्त और स्वादिष्ट खाद समझकर उपजाते और इस्तेमाल में लाते रहे हैं।
स्कर्वी रोग भी पपीता के सहारे अच्छा होने लगता है कुछ लोग इस अमूल्य विधि के रूप में भी मानते हैं यह शरीर का क्षार संतुलित रखता है विटामिन ए और सी की प्राप्ति का बहुत अच्छा साधन है और विटामिन बी और डी भी इसमें अच्छी मात्रा में होता है ।
रोज ढाई सौ ग्राम पका पपीता खाया जाए तो हालत सुधर जाती है यह उदर और आंतों की सफाई कर देता है आंतों में पाचक क्षार का प्राकृतिक स्तर बनाने में सहायक होता है और इस प्रकार पाचन संस्थान से तंतुओं को स्वस्थ और शक्तिशाली बना देता है । अल्पकाल में ही उन सारे विकारों को भी दूर कर देता है जो रोग उत्पन्न करने वाली विषमयता उत्पन्न करते हैं प्रत्येक बीमारी का कारण आंतों की सफाई है। इस स्थिति का निवारण करने के लिए अगर आंतें साफ रहे तो भोजन में आनंद आने लगे और उसका अच्छा परिपाक भी है । पपीते में सफाई की क्रिया वाले सभी तत्व मौजूद हैं सांस में आने वाली दुर्गंध दूर हो जाती है और इसी प्रकार सारे शरीर की सफाई हो जाती है।
पपीते में विटामिन ए अच्छी मात्रा में होता है शरीर के विशेष कर त्वचा और कला के कोषाणुओं के साधारण रूप में काम करने योग्य रहने के लिए बहुत आवश्यक है इसी कारण इसे त्वचा और नेत्र विटामिन कहां जाता है । यह लंबी आयु ग्रंथियां की क्षमता बढ़ाता है । विटामिन ए शरीर के लिए बहुत उपयोगी है और पपीते में अच्छी मात्रा में पाया जाता है । पपीते में कैल्शियम भी अच्छी मात्रा में होता है। यह अच्छे तत्वों के निर्माण एवं नाडियो और पेशियों की क्रिया ठीक रखने के लिए सहायक होता है इससे नेत्र ज्योति साफ़ रहती है और अगर कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में नाम मिले हड्डियां कमजोर होने लगती हैं । हृदय भी ठीक तरह से काम नहीं करेगा चिड़चिड़ापन आ जाएगा चमडी रुखी रुखी बनी रहेगी और दांतों में विकार और मसूड़े भी विकृत हो जाएंगे।
इसमें विटामिन बी और सी तो अच्छी मात्रा में पाये ही जाते हैं विटामिन डी भी अल्प मात्रा में रहता है फास्फोरस मैग्नीशियम सोडियम तथा अन्य खनिज लवण भी इसमें रहते हैं इससे प्राप्त होने वाले पपेना, फल में ही नहीं पते में भी रहता है इसका श्वेत सार और शर्करा मंजन करता है और इसका क्षारिया प्रभाव तो सबसे महत्व का है ही इसे हमेशा काला नमक लगाकर खाएं कई लोगों को इससे पेट भारी-भारी लगता है तो उन्हें थोड़ा-थोड़ा लेना चाहिए।
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