देश

सुप्रीम कोर्ट ने ED निदेशक मिश्रा के सेवा विस्तार को लेकर किया सवाल- क्या कोई व्यक्ति इतना जरूरी हो सकता है कि उसके बिना काम नहीं हो सके ?

नई दिल्ली।   प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा को और सेवा विस्तार नहीं देने के निर्देश के बावजूद उनके कार्यकाल की अवधि तीसरी बार बढ़ाए जाने पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार से बुधवार को सवाल किया कि क्या कोई व्यक्ति इतना जरूरी हो सकता है कि उसके बिना काम नहीं हो सके? शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने 2021 के अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा था कि सेवानिवृत्ति की आयु होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक के पद पर रहने वाले अधिकारियों को दिया गया कार्यकाल का विस्तार छोटी अवधि के लिए होना चाहिए और उसने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि मिश्रा को सेवा में आगे कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा ‎कि मिश्रा का विस्तार प्रशासनिक कारणों से आवश्यक था और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के भारत के मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण था। इस पर पीठ ने सवालों की झड़ी लगाते हुए पूछा, क्या ईडी में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है जो उनका काम कर सके? क्या एक व्यक्ति इतना जरूरी हो सकता है? आप के मुताबिक ईडी में कोई और सक्षम व्यक्ति है ही नहीं? 2023 के बाद इस पद का क्या होगा जब मिश्रा सेवानिवृत्त हो जाएंगे?’ इस पर तुषार मेहता ने कहा ‎कि मनी लॉन्ड्रिंग पर भारत के कानून की अगली सहकर्मी समीक्षा 2023 में होनी है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारत की रेटिंग नीचे नहीं जाए, प्रवर्तन निदेशालय में नेतृत्व की निरंतरता महत्वपूर्ण है। मिश्रा लगातार कार्यबल से बात कर रहे हैं और इस काम के लिए वह सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। कोई भी बेहद जरूरी नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों में निरंतरता जरूरी है।

तुषार मेहता ने एक बार फिर राजनेताओं की तरफ से एजेंसी के खिलाफ दायर याचिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा ‎कि याचिकाकर्ताओं की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ गंभीर मामले चल रहे हैं। ऐसे में इन लोगों के याचिका दाखिल करने पर मुझे आपत्ति है। मेहता ने कहा ‎कि इनमें से कुछ के पास बेहिसाब दौलत है और वे इसका ब्योरा नहीं देते। एक मामले में तो नोट गिनने वाली मशीनें लानी पड़ी थीं। मेहता ने पूछा ‎कि क्या अदालत ऐसे लोगों के इशारे पर दाखिल याचिकाओं को सुनेगा जो एजेंसियों पर दबाव डालने की मंशा रखते हैं। हालांकि पीठ ने मेहता की दलीलें स्वीकार नहीं की।

शीर्ष अदालत ने मेहता के इस प्रतिवेदन पर असहमति जताई और कहा, ‘‘केवल इसलिए कि कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का सदस्य है, क्या यह उसे याचिका दायर करने की अनुमति नहीं देने का आधार हो सकता है? क्या उसे अदालत आने से रोका जा सकता है?” मेहता अपनी बात पर अड़े रहे और उन्होंने कहा कि जनहित याचिका को निजी हित नहीं, बल्कि जनहित तक सीमित होना चाहिए। मामले में सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और 8 मई को जारी रहेगी। न्यायालय ने मिश्रा को तीसरी बार सेवा विस्तार दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर 12 दिसंबर को केंद्र और अन्य से जवाब मांगा था। आधिकारिक आदेश के अनुसार, केंद्र सरकार ने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी के पद पर मिश्रा को एक साल के लिए तीसरा सेवा विस्तार दिया था।

nobleexpress

Recent Posts

रूस ने क्यों लगाया 1 अप्रैल से गैसोलीन एक्सपोर्ट पर बैन?

रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार, मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी युद्ध की वजह…

20 hours ago

भोपाल के बंसल अस्पताल ने रचा इतिहास: 500 से अधिक सफल किडनी ट्रांसप्लांट पूरे

भोपाल (मध्य प्रदेश): चिकित्सा के क्षेत्र में राजधानी भोपाल के बंसल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने…

2 weeks ago

मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ में पहली बार उन्नत रियोलिटिक थ्रोम्बेक्टॉमी की 24×7 सुविधा शुरू, बिना बड़ी सर्जरी हटेगा खून का थक्का

भोपाल। स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए नोबल मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल,…

1 month ago

नोबल हॉस्पिटल में आज दो बड़े नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर — BMD और कैंसर परामर्श

भोपाल । मिसरोद स्थित नोबल मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में आज आमजन के लिए दो महत्वपूर्ण स्वास्थ्य…

2 months ago

Ajit Pawar Plane Crash: नहीं रहे महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार, बारामती में विमान हादसे में दुखद निधन

पुणे/बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति से एक बेहद स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई है। राज्य…

2 months ago

UFBU Bank Strike: 5-दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर भोपाल में गरजा बैंककर्मी, देशभर में कामकाज ठप

भोपाल: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बैंकिंग सेक्टर में आज…

2 months ago