जल पर राज्यमंत्रियों के पहले अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन में वॉटर विजन@2047 पर चर्चा

भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के सम्बंध में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप, केंद्र सरकार कार्य-योजना और भारत परिकल्पना प्रलेख – 2047 को तैयार करने के लिये चर्चा कर रही है।

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भारत -2047 के अंग के रूप में जल सुरक्षा की चुनौतियों के समाधान के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने ‘ 5 P’ का मंत्र दिया था, जिसमें Political Will (राजनीतिक इच्छा शक्ति), Public Financing (लोक वित्त), Partnership (साझेदारी), Public Participation (जन भागीदारी) और Persuasion For  Sustainability  (निरंतरता के लिये प्रेरणा) शामिल है। आने वाले वर्षों में ऊंचाइयां हासिल करने के भारत के प्रयासों में भारत का जल सेक्टर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।

जल शक्ति मंत्रालय “जल पर राज्यमंत्रियों के पहले अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन” का आयोजन कर रहा है, जिसका विषय “वॉटर विजन -2047” है। इसका आयोजन 5 और 6 जनवरी, 2023 को भोपाल, मध्यप्रदेश में किया जा रहा है। इस दो दिवसीय सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य है राज्यों के विभिन्न जल हितधारकों से इंडिया@2047 और 5पी के लिये विचार प्राप्त करना। ऐसा करना इसलिये अभीष्ट है क्योंकि जल राज्य का विषय है। इसके साथ ही राज्यों के साथ संलग्नता व साझेदारी में सुधार करना तथा जल शक्ति मंत्रालय की पहलों व योजनाओं को राज्यों के साथ साझा करना भी उक्त कार्यक्रम का लक्ष्य है।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावट कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। जल शक्ति और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्यमंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल भी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित रहेंगे। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस सम्मेलन के दौरान जल प्रशासन पर एक महत्त्वपूर्ण विषयगत सत्र की अध्यक्षता करेंगे। सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) और सिंचाई मंत्रियों को वॉटर विजन@2047 का ब्लू-प्रिंट तथा देश की जल समस्याओं का समाधान करने को रोड-मैप तैयार करने के लिये निमंत्रित किया गया है।

इस सम्मेलन की अंतर्दृष्टि को बढ़ाने के उद्देश्य से एक पूर्ण सत्र का भी आयोजन किया जायेगा, जो वॉटर विजन@2047 को केंद्र में रखते हुये सम्मेलन का एजेंडा निर्धारित करेगा। सम्मेलन में पांच विषयगत सत्र होंगेः

  1. जल की कमी, जल की अधिकता और पहाड़ी इलाकों में जल सुरक्षा;
  2. बेकार चले जाने वाले पानी/गदले पानी को दोबारा इस्तेमाल करने सहित जल उपयोगिता दक्षता;
  3. जल प्रशासन;
  4. जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने में सक्षम जल अधोरचना, और
  5. जल गुणवत्ता।

Anand

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