प्रदेश में जन-भागीदारी से जल प्रबंधन के लिए गतिविधियाँ जारी : मुख्यमंत्री शिवराज चौहान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर देश में पहली बार जल-संरक्षण पर राज्यों के मंत्रियों का प्रथम अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन कुशाभाऊ ठाकरे इन्टरनेशनल कन्वेशन सेंटर भोपाल में आरंभ हुआ। प्रधानमंत्री  मोदी के वर्चुअली दिए गए वीडियो संदेश से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने अपने विचार रखे। केन्द्रीय जलशक्ति और खाद्य प्र-संस्‍करण उद्योग राज्य मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल उपस्थित थे। वाटर विजन@2047 में सभी राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी और सिंचाई मंत्री तथा संबंधित विभागों के अधिकारी सम्मिलित हुए। छह जनवरी तक चलने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में जल समस्याओं के समाधान का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

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देश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बना रहे  :प्रधानमंत्री मोदी 

प्रधानमंत्री  ने कहा कि देश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बना रहा है, जिसमें अब तक 25 हजार अमृत सरोवर बन चुके हैं। उन्होंने समस्याओं की पहचान करने और समाधान खोजने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग और स्टार्टअप को इनसे जोड़ने की आवश्यकता बताई। जल जीवन मिशन की सफलता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने प्रस्ताव दिया कि ग्राम पंचायतें जल जीवन मिशन का नेतृत्व करें। फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती, जल-संरक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। देश में ड्रॉप-मोर क्रॉप अभियान को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने अटल भू-जल संरक्षण योजना में भू-जल पुर्नभरण के लिए माइक्रो स्तर पर गतिविधियाँ संचालित करने की आवश्यकता भी बतायी।

सिंचाई क्षमता 7 लाख 50 से  बढ़ कर 43 लाख हेक्टेयर  : मुख्यमंत्री शिवराज चौहान

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश में जल-संरक्षण और उसके मितव्ययी उपयोग के लिए संवेदनशीलता के साथ गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। प्रदेश में वर्ष 2003-04 तक सिंचाई क्षमता 7 लाख 50 हजार हेक्टेयर थी, जो अब बढ़ कर 43 लाख हेक्टेयर हो गई है। हमारा लक्ष्य 65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का है। जल के मितव्ययी उपयोग के लिए पाइप लाइन और स्प्रिंकलर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में वर्ष 2007 में जलाभिषेक अभियान आरंभ किया गया। जल प्रबंधन में जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए सभी जिलों में जल संसद, जल सम्मेलन और गाँव में जल यात्राएँ हुई। जलाभिषेक अभियान में बड़ी संख्या में बोरी बंधान, चेक डैम, स्टॉप डैम का निर्माण हुआ। प्रदेश में नदी पुनर्जीवन के कार्य को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। नर्मदा सेवा यात्रा में नदी के दोनों ओर वृक्षारोपण को अभियान के रूप में लिया गया। प्रदेश में जल-जीवन मिशन में 50 हजार करोड़ रूपए के कार्य चल रहे हैं, इससे 46% घरों को नल से जल उपलब्ध कराना संभव होगा। सभी पहलुओं को सम्मिलित करते हुए प्रदेश में अगले एक-दो माह में जल नीति लाई जाएगी। मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा पेड़ और पानी का चोली दामन का साथ है। मैंने स्वयं प्रतिदिन पौधे लगाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प के अनुसार मैं प्रतिदिन तीन पौधे लगाता हूँ। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वाटर विजन@2047 में आए सभी प्रतिभागियों को 6 जनवरी को पौध-रोपण के लिए आमंत्रित किया।  यह पौध-रोपण पूरे देश को जल-संरक्षण का संदेश देगा और वाटर विजन@2047 की स्मृतियों को अक्षुण्ण रखेगा।

देश में जल की भण्डारण क्षमता को बढ़ाना भी आवश्यक : जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोपाल में वाटर विजन@2047 के आयोजन की सहमति देने और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान का आभार माना। मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थ-व्यवस्था है। हमारा देश विकसित देश बनने की ओर अग्रसर है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और प्रदूषण की चुनौती को देखते हुए माइक्रो स्तर पर समग्र जल-प्रबंधन के लिए कार्य योजनाएँ बनाना आवश्यक है। देश में जल की भण्डारण क्षमता को बढ़ाना भी आवश्यक है। यह छोटी संरचनाओं के निर्माण को प्रोत्साहित करने और भू-गर्भीय जल-संरक्षण से संभव होगा।

दो दिवसीय आयोजन में पाँच विषयों – जल की कमी- जल की अधिकता और पहाड़ी इलाकों में जल-संरक्षण, पानी का दोबारा इस्तेमाल, जल सुशासन, जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना करने में सक्षम जल अधो-संरचना और जल गुणवत्ता पर सत्र होंगे।

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