देश

वन विभाग को रास नहीं आयी आरिफ की सारस से दोस्ती, दर्ज किया एफआईआर

अमेठी : अमेठी वाले आरिफ गुर्जर और सारस की दोस्ती जहां एक तरफ मिसाल कायम कर रही है वहीं मुद्दा भी बनी हुई है। हुआ यूं कि अगस्त 2022 में आरिफ की मुलाकात सारस से हुई। उस समय सारस जख्मी था। आरिफ ने उसकी जान बचाई। तब से ही सारस उसके साथ परिवार में रहने लगा और इमोशनली अटैच हो गया। जब मन होता वो अपनी मर्जी से उड़ जाता, फिर आकर आरिफ के साथ रहने लगता। ऐसे ही महीनों कब निकल गए, पता ही नहीं चला।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

आरिफ और सारस की दोस्ती का कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इस बात की भनक जैसे ही वन विभाग को लगी, उन्होंने सारस को आरिफ से अलग कर दिया। उसे समसपुर पक्षी विहार छोड़ दिया। जहां से अपने दोस्त आरिफ की तलाश में सारस उड़कर नजदीकी गांव जा पहुंचा। जिस पर अखिलेश ने दो ट्वीट किए। इसमें कहा कि सारस को अमेठी से जबरदस्ती लाया गया था। पक्षी के प्रति ऐसी लापरवाही गंभीर है। भाजपा सरकार तत्काल सारस खोजे, नहीं तो पूरी दुनिया के पक्षी-प्रेमी आंदोलन करेंगे। वन विभाग ने उसे दोबारा  पकड़ लिया। इसके बाद उसे खुले में न रखकर कानपुर चिड़ियाघर में रखा गया। हालात यह है कि सारस ने खाना-पीना छोड़ दिया है। ऐसे में अब सारस को वापस आरिफ के पास लाने की मुहिम छिड़ गई है।

25 मार्च को समाजवादी पार्टी सुप्रिमो और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरिफ़ के दोस्त सारस का एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में सारस छोटे से पिंजरे के अंदर नज़र आ रहा है। वो बेहद शांत है और दुख की बात है कि न तो वो ज़्यादा दूर तक घूम-फिर सकता है और न ही उड़ सकता है। ये वीडियो देखकर पत्थर दिल इंसान भी पिघल जाएगा।

अखिलेश यादव ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, ‘सारस को तो कानपुर चिड़ियाघर भेज दिया… क्या गोलू को भी गोरखपुर चिड़ियाघर भेजेंगे?’

आरिफ के साथ सारस की दोस्ती गलत है?

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की धारा 39 के तहत आरिफ को जब घायल सारस मिला तो उसे प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद लोकल वन विभाग अधिकारी को यह बताना चाहिए था। वो पास के पुलिस स्टेशन में भी इसकी जानकारी दे सकता था। इस काम के लिए कानूनन किसी व्यक्ति के पास 48 घंटे का वक्त होता है। दरअसल, सारस यूपी का राजकीय पक्षी है. बताया जाता है कि किसी भी संरक्षित पक्षी या जानवर को रखना ग़ैरक़ानूनी है. उसे खिलाना पिलाना भी ग़ैरक़ानूनी है.

वन्य जीव संरक्षण कानून आखिर है क्या?

पशु-पक्षियों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए भारत सरकार ने साल 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम पारित किया था। इसका मकसद वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था। इस में साल 2003 में संशोधन किया गया, जिसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रखा गया। इसमें दंड और जुर्माना को और भी सख्त कर दिया गया है।

क्या सारस को पालने में हमारे देश में पाबंदी है?

बिल्कुल देश में कुछ जानवरों को पालने पर पाबंदी है। जिसके अंतर्गत सारस भी आता है। यही वजह है कि आरिफ पर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 का उल्लंघन करने के आरोप में धारा 2, 9, 29, 51 और धारा 52 के तहत केस दर्ज किया गया है।

भारत में कौन-कौन से पशु-पक्षी पाल सकते हैं?

कुत्ता, बिल्ली, गाय, भैस, बकरी, कबूतर (कुछ विशेष), भेड़, खरगोश, मुर्गा, छोटी मछली

भारत में इन 15 पशु-पक्षियों को पालने पर है पाबंदी

तोता, मोर, बत्तख (कुछ विशेष), तीतर, उल्लू, बाज, ऊंट, बंदर, हाथी, हिरन, सफेद,चूहा, सांप, मगरमच्छ, एलिगेटर, कछुआ

तोता पालना, उसको पिंजड़े में रखना भी अपराध है


वाइल्डलाइफ के मुताबिक, तोते या किसी अन्य पक्षी को पिंजड़े में कैद करके रखना और उससे किसी भी तरह का लाभ लेने के लिए प्रशिक्षण देना कानूनन अपराध है। भारत में कानून इजाजत नहीं देता कि किसी भी पक्षी को कैद करके रखा जाए।

nobleexpress

Recent Posts

भारत सरकार ने सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम का किया परीक्षण: घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली: हाल ही में देशभर के कई स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को एक "बेहद गंभीर चेतावनी"…

2 months ago

भोपाल के मेधावी विद्यार्थियों से मिले मंत्री विश्वास सारंग उज्ज्वल भविष्य के लिए किया प्रेरित

भोपाल।  राजधानी भोपाल में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करते हुए रोज़…

2 months ago

गर्भावस्था केवल शारीरिक बदलाव नहीं, भावनाओं की भी एक नई यात्रा है: नोबल मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में ‘गर्भ संस्कार’ सत्र आयोजित

भोपाल। शहर के नोबल मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल द्वारा “गर्भ संस्कार : नोबल पहल” के अंतर्गत…

2 months ago

मिडिल ईस्ट संकट: क्या बंद हो जाएंगे Google, WhatsApp और Gmail? जानें भारत पर इसका असर

नई दिल्ली/दुबई: मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब केवल ज़मीनी जंग तक…

3 months ago

रूस ने क्यों लगाया 1 अप्रैल से गैसोलीन एक्सपोर्ट पर बैन?

रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार, मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी युद्ध की वजह…

3 months ago