बस कुछ साल और फिर आपको रात में दिखना बंद हो जाएगा आसमान, जानिए क्या है मामला

बस कुछ साल और फिर आपको रात में आसमान दिखना बंद हो जाएगा। ऐसा सिर्फ अपने देश भारत में ही नहीं होगा बल्कि पूरी दुनिया में होगा। इसकी वजह है वो रोशनी जिससे आपके आपके घर, दफ्तर, सड़कें रोशन हो रही हैं. मानव निर्मित रोशनी की मात्रा और निरंतरता इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि रात में आसमान धुंधला होता जा रहा है।प्रकाश का प्रदूषण रात के समय आसमान पर दिखने वाली चमक-दमक को कहते हैं। प्रकाश का प्रदूषण हमारे घरों में दरवाजों और खिड़कियों के जरिये बाहर सड़कों पर लगे हुए बिजली के खम्भों और लैम्पों से भी घुस आता है।

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तेजी से बढ़ रहा है धरती का प्रकाश

पिछले कुछ सालों में दुनिया में शहरी इलाकों का दायरा फैलता चला जा रहा है।  यही वजह है कि रात की चमक तो दुनिया में बढ़ ही रही है, उसका दायरा भी फैलता जा रहा है जिसने तारों का अवलोकन और ज्यादा दुश्वार बना दिया है।  क्योंकि रात में तारों से पृथ्वी की ओर आने वाली रोशनी धरती के प्रकाश प्रदूषण से मिल जाता है।

कम दिखते जा रहे है तारे

शोधकर्ताओं ने पाया कि रात का आसमान 2011 से 2022 तक करीब 7 से 10 फीसद ज्यादा चमकीला हो गया है। इसका मतलब है कि आठ साल से कम के समय में ही आसमान की चमक दो गुना हो गई है और पिछले 18 सालों में चार गुना ज्यादा हो गई है। शोधकर्ताओ ने आकलन कर पाया कि जिस बच्चे ने दिखाई देने वाले 250 तारों के समय जन्म लिया होगा, वही बच्चा अपना स्कूल पूरा करने पर सौ से भी कम तारे देख पाएगा।

प्रकाश प्रदूषण का गहरा असर

विशेषज्ञों के अनुसार, रात में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की छवियों और पृथ्वी के वीडियो देखते हुए लोग आमतौर पर शहर की रोशनी से प्रभावित होते हैं। लेकिन, वे नहीं समझते कि ये प्रदूषण की छवियां हैं। हालांकि हाल के वर्षों में प्रकाश प्रदूषण में सुधार होने की उम्मीद थी क्योंकि कई विकसित देशों में पुरानी स्ट्रीट लाइट्स की जगह आधुनिक एलईडी का प्रयोग हो रहा है, जिनका प्रकाश नीचे की ओर होता है। लेकिन, रोशनी के कई प्रकार होते हैं जैसे स्ट्रीट लाइट्स, सजावट और विज्ञापनों की लाइट्स आदि। ये समग्र रूप से आकाश की चमक को बदतर बना रहे हैं।
अलग-अलग दर से चमक रहा आसमान

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आसमान अलग-अलग दर से चमक रहा है। अध्ययन में पाया गया है कि यूरोप में यह गति 6.5 फीसदी प्रति वर्ष है, जबकि उत्तरी अमरीका में आसमान की रात की चमक हर साल 10.4 फीसदी बढ़ रही है। हालांकि शोधकर्ताओं के पास विकासशील देशों का पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं था, जहां यह बदलाव अधिक हो रहा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के पिछले साल आए एक अध्ययन के अनुसार, एलईडी लाइटिंग की अपेक्षाकृत कम लागत भी समस्या में योगदान दे रही है।

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