मध्यप्रदेश

MP के युवाओं से हैदराबाद में बंधक बनाकर करवाई जाती थी टॉयलेट की साफ-सफाई

सीहोर। मप्र में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने और दिलवाने के बड़े-बड़े वादे किए हैं। लेकिन सारे वादे खोखले साबित हुए हैं।  प्रदेश में शिक्षित युवाओं को रोजगार देने के लिए मेलों का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी सरकार द्वारा जमकर ब्रांडिंग भी की जा रही है लेकिन मेलों में कंपनियों द्वारा चयनित बेरोजगारों के साथ किस तरह का अमानवीय कृत्य किया जा रहा है, इसका ताजा मामला मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में  शिक्षित युवक-युवतियों के साथ रोजगार देने के नाम पर रोजगार मेले में धोखा किया गया।

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दरअसल, भेरूंदा  में 18 मई को रोजगार मेले का आयोजन जनपद पंचायत में हुआ था। जिसमें क्षेत्र के कई युवाओं (युवक-युवती) को रोजगार देने का वादा कर कंपनियां ने उन्हें नियुक्ति दिए। वहीं कैपिटल कंपनी ने भी सुपरवाइजर और सुरक्षा गार्ड के नाम पर कुछ युवाओं का चयन कर उन्हें नियुक्ति दिया। हैदराबाद पहुंचने के बाद युवाओं से 7 हजार 500 रुपए ट्रेनिंग के नाम पर जमा करवाएं और उनसे मजदूरों की तरह काम करवाया। उन्हें सुबह 6.00 बजे ही उठा देते थे और उसके बाद शौचालय, बाथरूम साफ करवाना, झाड़ू-पोछा लगवाना, खाना बनवाना यहां तक कि तगारी और फावड़े का काम भी युवाओं से करवाया जाता था और उन्हें घर पर किसी से बात नहीं कर देने देते थे। इससे परेशान होकर युवाओं ने रात के अंधेरे में भागकर भेरूंदा लौटे और परिवार वालों को आपबीती सुनाई।

वहीं एक युवक ट्रेनिंग के दौरान वहां बीमार हो गया था, जिसका इलाज तक कंपनी ने नहीं कराया। घर आने के एक दिन बाद ही उसकी मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों ने कैपिटल कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। 17 साल में 17 हजार ने की आत्महत्या प्रदेश के युवा किस तरह दबाव में हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां पिछले 17 साल में 17 हजार से अधिक युवाओं ने आत्महत्या कर ली है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार की नीतियों का खामियाजा युवाओं को उठाना पड़ रहा है।

तथ्य यह है कि व्यवसायिक परीक्षा मंडल ने न सिर्फ युवाओं के भविष्य को लूटा बल्कि बीते 10 साल में उसने इन बेरोजगार युवाओं से 1046 करोड़ रुपए फीस के रूप में वसूल कर 455 करोड़ रुपए का शुद्ध मनाफा भी कमाया। राज्य सरकार ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि बीते सात वर्षों में उसने 106 विभिन्न प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं में 424 करोड़ 36 लाख रुपए 01 करोड़ 24 लाख आवेदकों से वसूली है।

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