नई दिल्ली: देश की कंपनियों का मुनाफा एक तरफ तो साल दर साल बढ़ता जा रहा है और दूसरी ओर इन कंपनियों में छंटनी भी तेजी से बढ़ रही है। एक सर्वे में बताया गया कि कंपनियों का मुनाफा बढ़ने के बावजूद तेजी से छंटनी होना चिंताजनक स्थिति है। ये कंपनियां साइलेंट फायरिंग कर रही हैं. इसका मतलब है कि बिना किसी को खबर हुए ही धड़ाधड़ लोगों की नौकरियां छीनती जा रही हैं । इसमें कंपनियां कर्मचारियों को परोक्ष तौर पर नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर कर देती हैं। यह रिपोर्ट 1223 कंपनियों और 1069 कर्मचारियों से ली गई जानकारी पर आधारित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से यह ट्रेंड बढ़ा है। कई कंपनियां अपने कमजोर कर्मचारियों को ज्यादा काम देकर या उन्हें जरूरी प्रोजेक्ट्स से अलग रखकर नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर रही हैं।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रिपोर्ट में नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के विचार शामिल हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को नई तकनीक सिखाने पर जोर दे रही हैं। वहीं, कुछ कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। यह रिपोर्ट बदलते कामकाजी माहौल में ‘साइलेंट फायरिंग’, तकनीक और कर्मचारियों पर उनके असर को दर्शाती है।
कर्मचारी समाधान और मानव संसाधन सेवा प्रदाता जीनियस कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि तेजी से प्रौद्योगिकी को अपनाने के साथ खामोश छंटनी यानी साइलेंट फायरिंग बढ़ी है । कंपनियां जब कर्मचारियों को अप्रत्यक्ष रूप से उनकी भूमिका छोड़ने के लिए मजबूर करने की रणनीति अपनाती हैं, तो इसे खामोश छंटनी कहते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 प्रतिशत नियोक्ता अनावश्यक पदों के लिए छंटनी को प्राथमिकता दे रहे हैं ।
यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कंपनियां कर्मचारियों को सीधे नौकरी से निकालने की बजाय धीरे-धीरे उन्हें कंपनी छोड़ने के लिए मजबूर करती हैं। यह एक तरह की छुपी हुई छंटनी है, जहां कर्मचारी को यह एहसास कराया जाता है कि वह कंपनी के लिए अब उपयोगी नहीं है।साइलेंट फायरिंग में कंपनी की तरफ से कर्मचारियों के लिए कुछ ऐसी स्थितियां पैदा कर दी जाती हैं कि वह नौकरी छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं । इसके तहत कई तरह के काम किए जाते हैं. कई बार कर्मचारी के लिए काम करने के हालात खराब किए जाते हैं, उसे बात-बात पर टोकना शुरू किया जाता है और उसे ऐसे काम दिए जाते हैं, जो उसे बिल्कुल पसंद ना हों । इन सब के चलते कर्मचारी नौकरी छोड़ने को मजबूर हो जाता है ।
एक तरफ तो कंपनियां छंटनी कर रही हैं और दूसरी ओर इन कंपनियों का मुनाफा लगातार बढ़ता जा रहा है। साल 2019 में सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स घटाकर कंपनियों को फायदा पहुंचाया था, लेकिन कंपनियों ने रोजगार भी नहीं बढ़ाया जिसकी वजह से आम आदमी को इसका फायदा नहीं मिला। इस दौरान कॉरपोरेट प्रॉफिट में 4 गुना इजाफा हुआ है, जबकि औसत इंक्रीमेंट 1 फीसदी से भी कम रहा है।
34% नियोक्ता इसे पूरी तरह से नकारते हैं। जबकि 28% इसे अक्सर इस्तेमाल करते हैं और 29% कभी-कभी। वे कहते हैं कि इससे काम में तेज़ी आती है और कर्मचारियों को तरक्की के मौके मिलते हैं। कर्मचारियों के नज़रिए से, ‘साइलेंट फायरिंग’ और नई तकनीक के इस्तेमाल ने उनके कामकाजी अनुभव को बहुत प्रभावित किया है। 55% कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें अचानक जरूरी प्रोजेक्ट्स और फैसलों से अलग कर दिया गया। 68% कर्मचारियों ने कहा कि मैनेजमेंट उन पर जरूरत से ज्यादा दबाव बनाता है। AI और तकनीक को उनके काम का मानक बना दिया है। इससे काम पर तनाव बढ़ गया है। 32% से ज्यादा कर्मचारियों को लगता है कि तकनीकी विकास के कारण उनके काम की अहमियत कम हो गई है। इस वजह से उनकी तरक्की रुकी हुई है। वे नौकरी छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं।
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