भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी (Bhopal Gas Tragedy) के 40 साल बाद बुधवार रात को यूनियन कार्बाइड कारखाने (Union Carbide Factory) से करीब 377 टन जहरीला कचरा (Toxic waste) 12 सीलबंद कंटेनर ट्रकों में भर कर भोपाल से 250 किलोमीटर दूर धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र (Pithampur Industrial Area) में ले जाया गया। कचरा ले जाने वाले 12 कंटेनर ट्रकों ने रात करीब नौ बजे से सफर की शुरुआत की। इन ट्रकों ने बिना रुके सफर किया। इनके लिए एक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!40 साल पहले विश्व की भयावह त्रासदी में शुमार भोपाल गैसकांड को अंजाम देने वाली यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़ा जहरीला कचरा आखिरकार हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हटाया गया। हाइकोर्ट ने 6 जनवरी तक इस जहरीले कचरे को हटाने के निर्देश दिए थे और सरकार को 3 जनवरी को हाईकोर्ट में इस मामले में अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करना है। उसके पहले ही सरकार ने कल रात 12 कंटेनरों में भरकर इस जहरीले कचरे को इंदौर बायपास के रास्ते सुबह 5:00 बजे पीथमपुर के आशापुरा गांव स्थित रामकी इन्वाइरो फैक्ट्री में पहुंचा दिया।
भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के निदेशक स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि जलाने के बाद कचरे की राख की जांच की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि उसमें कोई हानिकारक तत्व बचा है या नहीं। एक बार जब यह पुष्टि होएगी कि विषाक्त तत्वों का कोई निशान नहीं बचा है तो राख को दो-परत की झिल्ली से ढक कर इसे दबा दिया जाएगा ताकि यह मिट्टी और पानी के संपर्क में न आए।
स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की देखरेख में विशेषज्ञों की एक टीम इस प्रक्रिया को अंजाम देगी। कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं का दावा है कि 2015 में पीथमपुर में परीक्षण के तौर पर 10 टन यूनियन कार्बाइड कचरे को जलाया गया था जिसके बाद आसपास के गांवों की मिट्टी, भूमिगत जल और जल स्रोत प्रदूषित हो गए हैं।
स्वतंत्र कुमार सिंह ने कार्यकर्ताओं के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2015 के परीक्षण की रिपोर्ट और सभी आपत्तियों की जांच के बाद ही पीथमपुर में कचरे के निपटान का फैसला लिया गया है। चिंता की कोई बात नहीं है। लगभग 1.75 लाख की आबादी वाले शहर पीथमपुर में कचरे के निपटान के विरोध में रविवार को बड़ी संख्या में लोगों ने विरोध मार्च निकाला था।
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