Global Investors Summit :बड़ा घोटाला -7000 करोड़ के निवेश पर फूंके 1100 करोड़ फिर बड़ा निवेश नहीं – जीतू पटवारी

भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश की वाणिज्यिक राजधानी इंदौर में अगले हफ्ते दो दिवसीय ग्लोबल इंन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होने जा रहा है। इससे पहले इस पर सियासत शुरू हो गई है।पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा की ग्लोबल इंन्वेस्टर्स समिट के नाम पर सरकार ने 1100 करोड़ रुपये फूंक दिए है लेकिन इसके बदले मात्रा 7000 करोड़ का ही निवेश आया है। वही सरकार पांच इन्वेस्टर समिट के दौरान 17.5 लाख करोड़ रुपये एमओयू प्रस्ताव प्राप्त होने का दावा कर रही है।

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शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि इन्वेस्टर समिट के बाद प्रदेश में न तो युवाओं को रोजगार मिला है और न ही उद्योग धंधे बढ़े हैं। उद्योगों के नाम पर भूमि कौडिय़ों के दाम दे दी गई लेकिन उस पर उद्योग स्थापित ही नहीं हुए। सरकार ने निवेश आमंत्रित करने के लिए देश-विदेश में यात्रा पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। उसका कोई लाभ प्रदेश को नहीं मिला है। जबकि कमल नाथ सरकार में जो निवेशक सम्मेलन किया गया था। उसके परिणाम सामने आ चुके हैं। इंदौर में होने वाली इन्वेस्टर समिट शिवराज की गुमराह करने वाली इन्वेस्टर समिट है।

श्वेत पत्र जारी करे सरकार
इन्वेस्टर समिट को लेकर जीतू पटवारी ने शिवराज सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इन्वेस्टर्स समिट का विरोध नहीं करती है। हमारा इसको लेकर स्वागत है लेकिन अभी तक प्रवेश में जितनी भी इन्वेस्टर्स समिट हुई हैं उनके निष्कर्षों को जनता के बीच लाया जाना चाहिए। इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर बेशकीमती जमीन उद्योगपतियों के नाम पर दे दी गई।

विदेशो में रोड शो पर करोड़ों खर्च

इन्वेस्टर समिट में विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई देशों के दौरे किये। इस दौरान उन्होंने वहां रोड शो भी किया। जीतू पटवारी ने कहा कि शिवराज ने 2014 से 2016 के बीच 9 विदेशी दौरे किये। इस दौरान साउथ अफ्रीका यूएई यूएसए जर्मनी जापान साउथ कोरिया सिंगापुर और चीन की यात्राओं के साथ ही रोड शो के नाम पर शिवराज सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये खर्च कर दिए।

मध्यप्रदेश पर 3 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज

वहीं पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एमपी ३ लाख करोड़ से अधिक के कर्ज में है। निवेश के लिए उद्योगपतियों में भरोसा होना आवश्यक है। भाजपा 20 साल के प्रयास के बाद भी मप्र को करप्शन मुक्त नहीं बना पाए। बीजेपी सरकार जनता को गुमराह करना चाहती है मप्र व्यापार का केंद्र है फिर भी इस ताकत का इस्तेमाल सरकार नहीं कर पाई। हम जल जंगल में अव्वल है फिर भी निवेश में सबसे पीछे है। बीजेपी सरकार केवल सत्ता में रहने के लिए झूठे प्रयास कर रही है।

मंत्रियों का काला चिठ्ठा खोलेगी कांग्रेस

जीतू पटवारी ने आगे कहा कि सीएम मंत्री और अधिकारियों ने 15 विदेशी यात्राओं में 11 अरब रुपए खर्च किए हैं। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने विदेश में 9 रोड शो किए लगभग 100 करोड़ खर्च किए। कितने पैसे इन्वेस्टर्स समिट में लगा कितना पैसा आया और कितना रोजगार मिला सरकार को यह सभी बाते व्हाइट पेपर पर लिख कर जनता के सामने रखना चाहिए। इसके साथ ही जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस 15 मंत्रियों के खिलाफ करप्शन का आरोप पत्र लाएगी। सभी मंत्रियों का तथ्यों के साथ काला खोला जाएगा।

निवेश में तमिलनाडु से भी पिछड़ा मप्र

शिवराज के विदेशी दौरे का कोई असर नहीं हुआ। प्रदेश में 2000 से 2018 के बीच देश में 23 लाख करोड़ का निवेश आया। लेकिन प्रदेश में मात्र 0.3 प्रतिशत निवेश(sincere)आया है। इस दौरान मध्यप्रदेश सर्वाधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने वाले सर्वश्रेष्ठ राज्यों में शामिल नहीं हो पाया। मध्यप्रदेश कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे छोटे से राज्य से भी पिछड़ गया। कर्नाटक में 2.1 लाख करोड़ रुपये और तमिलनाडु में 1.6 करोड़ का विदेशी निवेश आया। वहीं 11 वे स्थान पर रहे मध्यप्रदेश में मात्र 7420 करोड़ का निवेश आया। यही स्थिति सितंबर 2020 से 2022 के बीच रही यहा भी मध्यप्रदेश कर्नाटक और तमिलनाडु से पिछड़ गया। छोटे राज्य होने के बावजूद कर्नाटक में 2.7 लाख करोड़ रुपये और तमिलनाडु में 55 हजार करोड़ रुपये का विदेशी निवेश आया। वहीं मध्यप्रदेश पन्द्रहवें स्थान के साथ 3600 करोड़ का निवेश आकर्षित कर पाया। पिछले 18 सालो में प्रदेश सरकार ने 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। जिस पर सरकार 20 हजार करोड़ रुपये प्रति वर्ष ब्याज चूका रही है। जबकि 18 साल में 8 से 10 हजार करोड़ का विदेशी निवेश भी नहीं आया।

इन्वेस्टर सामिट में बड़ा घोटाला
इन्वेस्टर समिट में बड़ा घोटाला हुआ है। समिट में 6500 निवेश प्रस्तावों में से निवेश का दावा करने वाली कई कम्पनिया ही अस्तित्व में नहीं है।। कई एमओयू शून्य रुपये के निवेश के लिए किये गए है। सैकड़ो सरकारी संस्थानों को निवेशक बताया गया है। प्रदेश के १५० से अधिक नगर निगम एवं निगम मंडलों जिनके पास कर्मचारियों को तन्खा देने के पैसे नहीं है वे भी मध्यप्रदेश में उद्योग धंधे स्थापित करने के लिए शिवराज सरकार से एमओयू कर रहे है।

कितना निवेश आया बताए सरकार
सरकार ने प्रदेश में अब तक आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर बड़े-बड़े दावे किए हैं। वर्ष 2007 इंदौर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 1.22 लाख करोड़ साल 2010 खजुराहो समिट में 2.41 लाख करोड़ वर्ष 2012 इंदौर समिट में 2.94 लाख करोड़ साल 2014 इंदौर इन्वेस्टर्स समिट में 4.42 लाख करोड़ और वर्ष 2016 में इंदौर की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 5 लाख 62 हजार 847 करोड़ के 2630 निवेश के प्रस्ताव आने का दावा किया गया था लेकिन इसकी हकीकत अब तक सरकार ने जनता को बताई नहीं है। सभी इन्वेस्टर्स समिट के नाम पर सरकारी खज़ाने से करोड़ों रुपये फूंके गए कई विदेश यात्राएं की गईं। प्रदेश की तस्वीर बदलने के तमाम दावे के बीच बेरोजगारों की भावनाओं से खेलते हए रोजगार के बडे-बडे दावे भी बढ़-चढ़कर किए गए। कई कंपनियों को बड़े पैमाने पर ज़मीनों का आवंटन भी किया गया। लेकिन विकास का अबोध बालक अभी तक बड़ा क्यों नहीं हो पाया है?

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